समस हिंदी में आपका सुवागत है ...सोनू

Welcome to Sms Hindi

सभी भारतीयों से अनुरोध है कि वो अपने ब्लॉग पर "वन्दे मातरम्" अवश्य लिखें!

11.11.2011

11-11-11 आप सभी को शुभ हो और खुशियाँ लेकर आये!




कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है
छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है

नज़र ने नज़र से मुलाक़ात कर ली ,
रहे दोनों खामोश पर बात करली,
मोहब्बत की फिजा को जब खुश पाया,
इन आंखों ने रो रो के बरसात कर ली






  कोई दोस्त ऐसा बनाया जाये, 
जिसके आसुओं को पलकों में छुपाया जाए, 
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा, 
की अगर वो रहे उदास तो हमसे भी न मुस्कुराया जाये!







कीमती पीते हैं, लाजवाब पीते हैं
बहुत पीते हैं, बेहिसाब पीते हैं
जब भी आती है तेरी याद
हम खून बेच कर शराब पीते हैं






 






तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना सकता हूँ,
तुझसे मिले बिना तेरा हाल बता सकता हूँ,
है मेरी दोस्ती में इतना दम,
अपनी आँख का आँसू तेरी आँख से गिरा सकता हूँ
हम दोस्ती में हद ए गुज़र जायेंगे ,
यह जिंदगी आपके नाम कर जायेंगे,
आप रोया करेंगे हमे याद करके,
आपके दामन में इतना प्यार छोड़ जायेंगे..

हिचकियों से एक बात का पता चलता है,
 कि दोस्त  हमे याद तो करता है,
बात न करे तो क्या हुआ,
कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है



फूल सुख जाते है एक वक्त के बाद,

लोग बदल जाते है एक वक़्त के बाद,

अपनी दोस्ती भी टूटेगी एक वक़्त के बाद,

लेकिन वोह वक़्त आयेगा मेरी मौत के बाद...

दोस्तों की पहचान :-

जब हम बुलंदियों को छुते है तो नए नए दोस्तों की संख्या बढती जाती है
जब हम बेकार (जॉब लेस) होते है तो अपने भी पराये हो जाते है साथ में
दोस्तों की संख्या में कमी आ जाती है|

इसीलिए किसी पर भी भरोसा मत करो खुद के सिवा अगर आज आप बेकार (जॉब लेस) है| और आज का दिन आपके दोस्तों का है, कल का दिन आपका जरुर होगा अगर आप खुद पर भरोसा रखते है तो - सच्चा दोस्त

9.01.2011

आपको ईद और गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!

• अगर कोई आपका घर लूट रहा है तो
चिल्लाना मत, उसे लूटने देना क्योंकि शांति बड़ी चीज़ है, लूट नहीं! लूट पर चिल्लाने से शांति भंग होती है!


• राजघाट पर नारा लग रहा था “अन्ना नहीं ये
आंधी है, तभी जनता ने बोला “कहां छिपा राहुल गांधी है!

• अन्ना हज़ारे के साथ
दिक्कत ये है कि न तो वो नेपाली हैं और न ही ठग!

• दिग्विजय सिंह लंदन गए
हुए हैं। जनरल डायर की कब्र पर धरना देने!

• दिग्विजय सिंह पहले बोल रहे थे
कि अन्ना संघ के एजेंट है .. जब साबित नहीं कर पाए तब बोलने लगे कि अन्ना हज़ारे
संघ के एजेंट नहीं बल्कि LIC Agent हैं!

• आजकल टीवी पर दो ही चीज आ रही है
“समाजसेवियों के अनशन और दिग्विजय सिंह तथा मनीष तिवारी की अंटशंट!

• ए राजा, कनिमोझी, सुरेश कलमाडी और मधु कोडा...आज शाम छह बजे भ्रष्टाचार के पक्ष में
राहुल गाँधी की अगुवाई में इंडिया गेट पर Scandal March निकालेंगे!

• Google से तो कोई फायदा नहीं हुआ वक्त आ गया है कि राहुल बाबा का पता लगाने के लिए हम NASA
की मदद लें!

• सरकार समझ नहीं पा रही कि जब उसने आम आदमी को भूखा मारने का
पूरा बंदोबस्त किया है तो फिर वो भूख हड़ताल पर बैठने की ज़िद्द क्यों कर रहा
हैं?

• बचपन में बीमार पड़ने पर दिग्विजय सिंह को नर्स ने ग़लती से ORS की
जगह RSS का घोल पिला दिया...तब से वो जब भी मुंह खोलते हैं तो RSS बोलते
हैं!

• जहां तक नाचने का सवाल है, सुषमा कभी मनमोहन सिंह का मुकाबला नहीं कर
पाएंगी। कारण-फर्श पर नाचना, किसी की उंगलियों पर नाचने से ज्यादा आसान
है!

• कांग्रेस का कहना है कि इस देश में भूख से मरने की तो पूरी छूट है मगर
भूख हड़ताल पर बैठने की नहीं
आभार 
हरीश  धनोतिया E TV 9009007309

जो पीते थे खून जनता का
अब वो नेता चूस रहे हैं गन्ना
क्यूंकि उनको मज़ा चखाने अब आ गए हैं हमारे अन्ना
 
“दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे
हम वतन के लिए॒ सिर कटाते रहे”

 आपको ईद और गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें . 
श्री गणेश पर्व की आप सभी को बधाई एवं शुभकामनायें
विघ्हन हरता रिद्धि सिद्धि के दाता प्रभु श्री गणेश जी को नमन  और हम सभी की मनो कामना पूर्ण करें!
अपने ब्लॉग को यहां जोड़ा है

8.30.2011

पूज्य माता जी को मेरी कोटि-कोटि विनम्र श्रद्धांजली . ..सोनू शर्मा

  स्व० "श्रीमती सुगना कंवर राजपुरोहितजी" के जीवन पर एक नज़र
     "जीवन का लक्ष्य था समाज की सेवा"
     

"स्व० श्रीमति सुगना राजपुरोहित"
      "स्व० श्रीमति सुगना राजपुरोहित" एक नज़र मे तो एक सामान्य नारी की भाँति नज़र आती है ! लेकिन यह सोच इनकी जीवन शैली पढ़कर बदल जाएगी इन्होने अपने जीवन में तूफ़ानी झंझावतों
को झेलकर, आँधियों को मोड़ कर, अंधकार को चीरकार, परेशानियो को मसलकर एक नई राह बनाई और परिवार के साथ-साथ समाज सेवा में भी नाम रोशन किया! 

  इनका जन्म जोधपुर के एक छोटे से गाँव "कनोडीया" में सन् "जुलाई 1960 ई० मे (वि० स० 2017) लगभग में हुआ था! इनके पिता का नाम "स्व० श्री कौशल सिहं सेवड़" एक ज़मींदार किसान थे ! इनकी माता का नाम "स्व० श्रीमति मैंना देवी था ! माता पिता दोनो से सुगना कंवर उर्फ रत्न कंवर काफ़ी प्रभावित थी!


  इनको अपना आदर्श मानती थी ! छ: भाई बहनो मे सुगना कंवर उर्फ रत्न कंवर सबसे छोटी थी इसलिए सबसे लाडली थी तथा इनके बड़े भाई "श्री भंवर सिह" (पूर्व एम० टी० ओफिसर आर० ए० सी० पुलिस राजस्थान) इनको प्यार से बाया बाई-सा" कहते थे ! इनके समय मे गाँव मे लड़कियों को नहीं पढ़ाया जाता था!


  इनकी शिक्षा बड़े भाई के द्वारा घर पर हुई थी, इनके पिता "स्व० श्री ठा० कौशल सिंह" ने अपनी पुत्री को सदैव सत् संस्कार तथा समाज़ सेवा की सीख दी, साथ ही प्रभु कृपा से इनमे मानवीय गुण कूट-कूट कर भरे थे!

इनको बचपने से ही धार्मिक विचारो एंव समाज सेवा मे रूचि थी इनके पिता का समाज मे काफ़ी नाम था, इसलिए लोग आज भी उन्हे याद करते हैं , इसलिए इनकी रूचि समाज़ सेवा के प्रति और आकर्षित हुई!

 इनकी शादी मात्र "16 वर्ष की अल्प आयु" मे श्री बिरम सिंह पुत्र श्रीमान ठा० सुजान सिंह सिया" गाँव "मेघालासिया" जिला "जोधपुर" मे हुआ था ! इनकी माता जी सदैव कहती थी ! हमारी "रत्न" बहुत छोटी है ! लेकिन इन्होने परिवार की ज़िम्मेदारी बहुत जल्दी ही संभाल ली थी ! इनके देवर बहुत छोटे थे ! जिनकी देखभाल (परवरिश) भी इनको ही करनी पड़ती थी    क्योंकि इनकी सासू माँ का स्वर्गवास इनकी शादी से कुछ वर्ष पूर्व हुआ था इसलिए अपने तीन देवरो व एक ननद की ज़िम्मेदारी भी इनके कंधो पर थी उन्हे अपने पैरो पर खड़ा किया और इसके लिए इनको काफ़ी संघर्ष का सामना करना पड़ा था ! इनके तीन पुत्र एंव दो पुत्री थी ! जिनकी परवरिश बखूबी पूर्ण की इन्होने कभी हिम्मत नही हारी (जीवन के हर सफ़र में)!
 
         इनकी समाज सेवा मे बचपन से ही नाता रहा है ! इसलिए शादी के बाद भी परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ- साथ समाज़ सेवा में बहुत योगदान दिया था ! इनके सहयोग से आयोजित "प्राक्रतिक चिकित्सा शिविर" कई स्थानो पर सफलता पूर्ण किए गये तथा जिससे प्राक्रतिक चिकित्सा के प्रति लोगो की रूचि बढ़ी तथा इस चिकित्सा पद्धति के लोगो को जागरूक किया तथा ये शिविर आज भी लगाए जाते है यह सब इनके प्रयास से ही संभव हुआ था !

    इनके परिवार की गिनती आज "समाज सेवा" परिवरो में होती है ! इन्होने जीवन के अंतिम समय में भी एकता की मिसाल दी थी! इसका ही उदाहरण है कि परिवार से जिन सदस्यो ने आपस मे दूरी बना ली थी! वे फिर से संगठित हो गये परंतु विधि के विधान के अनुसार 48 वर्ष की अवस्था में 1 सितंबर 2008 दिन सोमवार(हिन्दी माह वि० स० 2065 भादवा सुदी द्वितीया में) हमें छोड़कर स्वर्गवासी हो गई! 

 स्व० श्रीमती सुगना कंवर" कहती थी -
     "जो जीवन दूसरों के काम आए तो उसे ही जीवन कहते हैं जो दूसरो के दुख मे दुखी और सुख मे सुखी होता है उसे इंसानियत कहते है!"
 
किसी ने ठीक कहा है! 

यू तो दुनिया में सदा रहने कोई नहीं आता है! 
     आप जैसे गई इस तरह कोई नहीं जाता है! 
इस उपवन् का दायित्व सौंपकर इतनी 
  जल्दी संसार से कोई नही जाता है!
 
आभार
हैम्स ओसिया इन्स्टिट्यूट 
 
आज की पोस्ट प्रिय मित्र ओर भाई सवाईजी की पूज्य माता स्व० श्रीमती सुगना कंवरजी की पावन स्मृति में उन्हीं को श्रद्धांजली स्वरूप समर्पित करता हूँ! 
 आप श्रद्धांजली इस ब्लॉग पर भी दे सकते हो
अधिक जाननें और पढ़नें के लिए  

Orkut Scraps - Rose
हे दुनिया के मालिक अगर जुदा करना था इस से तो अच्छा होता था इनसे मिलाया न होता!
 पूज्य माता जी को मेरी कोटि-कोटि विनम्र श्रद्धांजली . सोनू शर्मा 

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